FY 2026-27 (टैक्स ईयर 2026-27)

नई और पुरानी टैक्स व्यवस्था कैलकुलेटर

अपनी सैलरी डालें और देखें कि FY 2026-27 में नई या पुरानी टैक्स व्यवस्था में कितना टैक्स लगेगा, और किसमें आपका टैक्स कम बनता है।

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और विकल्प
वित्त वर्ष

इसका असर सिर्फ़ पुरानी व्यवस्था की छूट सीमा पर पड़ता है।

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आपका नतीजा

आपका टैक्स: ₹0 · नई व्यवस्था ₹1,17,000 बचाती है

इनकम टैक्स के बाद हाथ में: ₹1,00,000/महीना (नई व्यवस्था)

पूरी गणना देखें: नई व्यवस्थाहर कदम, उसका नियम और आधिकारिक स्रोत

1. टैक्सेबल आय

  1. ग्रॉस आय₹12,00,000
  2. स्टैंडर्ड डिडक्शन₹75,000

    धारा 19 (पहले 16(ia)): नई व्यवस्था में ₹75,000 · आयकर विभाग

  3. टैक्सेबल आय₹11,25,000

2. इनकम टैक्स

  1. स्लैब पर टैक्स₹52,500
    ₹0–4L @ 0%₹0
    ₹4L–8L @ 5%₹4,00,000 × 5% = ₹20,000
    ₹8L–12L @ 10%₹3,25,000 × 10% = ₹32,500

    धारा 202 (पहले 115BAC): नई व्यवस्था की स्लैब दरें · आयकर विभाग

  2. रिबेट₹52,500

    धारा 156 (पहले 87A): टैक्सेबल आय ₹12,00,000 या कम होने पर ₹60,000 तक की छूट · आयकर विभाग

  3. रिबेट के बाद टैक्स₹0
  4. हेल्थ और एजुकेशन सेस₹0

    इनकम टैक्स का 4% · आयकर विभाग: टैक्स दरें

  5. कुल इनकम टैक्स₹0

3. टैक्स के बाद आय

  1. ग्रॉस आय₹12,00,000
  2. कुल इनकम टैक्स₹0
  3. टैक्स के बाद आय₹12,00,000

हर लाइन दिखाने के लिए राउंड की गई है, इसलिए लाइनों के जोड़ और कुल में 1 का फ़र्क हो सकता है।

पूरी गणना देखें: पुरानी व्यवस्थाहर कदम, उसका नियम और आधिकारिक स्रोत

1. टैक्सेबल आय

  1. ग्रॉस आय₹12,00,000
  2. स्टैंडर्ड डिडक्शन₹50,000

    धारा 19 (पहले 16(ia)): पुरानी व्यवस्था में ₹50,000 · आयकर विभाग

  3. निवेश (PF, PPF, ELSS, बीमा…)₹1,50,000

    धारा 123 (पहले 80C): ₹1,50,000 तक · आयकर विभाग

  4. टैक्सेबल आय₹10,00,000

2. इनकम टैक्स

  1. स्लैब पर टैक्स₹1,12,500
    ₹0–2,50,000 @ 0%₹0
    ₹2,50,000–5L @ 5%₹2,50,000 × 5% = ₹12,500
    ₹5L–10L @ 20%₹5,00,000 × 20% = ₹1,00,000

    FY 2026-27 के लिए पुरानी व्यवस्था की स्लैब दरें · आयकर विभाग

  2. रिबेट के बाद टैक्स₹1,12,500
  3. हेल्थ और एजुकेशन सेस₹4,500

    इनकम टैक्स का 4% · आयकर विभाग: टैक्स दरें

  4. कुल इनकम टैक्स₹1,17,000

3. टैक्स के बाद आय

  1. ग्रॉस आय₹12,00,000
  2. कुल इनकम टैक्स₹1,17,000
  3. टैक्स के बाद आय₹10,83,000

हर लाइन दिखाने के लिए राउंड की गई है, इसलिए लाइनों के जोड़ और कुल में 1 का फ़र्क हो सकता है।

अगर ऐसा हो तो…स्लाइडर हिलाकर देखें कि टैक्स कैसे बदलता है

पुरानी व्यवस्था में और निवेश करें तो?

इन आंकड़ों पर टैक्स में कोई बदलाव नहीं।नई व्यवस्था फिर भी ₹1,17,000 सस्ती रहेगी।

धारा 123 (पहले 80C): कुल ₹1,50,000 तक; सिर्फ़ पुरानी व्यवस्था में।

पूरा ब्योरातालिकाएं, चार्ट और टैक्स बचत के सुझाव

नई व्यवस्था में दूसरी व्यवस्था के मुकाबले हर साल ₹1,17,000 कम टैक्स लगता है।

पुरानी व्यवस्था

स्टैंडर्ड डिडक्शन और ऊपर दर्ज की गई कटौतियां शामिल।

टैक्सेबल आय₹10,00,000
कुल कटौतियां₹2,00,000
सेस से पहले टैक्स₹1,12,500
हेल्थ और एजुकेशन सेस (4%)₹4,500

कुल टैक्स

₹1,17,000

प्रभावी दर: 9.8%

कम टैक्स

नई व्यवस्था

₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन। 80C/80D/HRA का फ़ायदा नहीं।

टैक्सेबल आय₹11,25,000
कुल कटौतियां₹75,000
सेस से पहले टैक्स₹0
हेल्थ और एजुकेशन सेस (4%)₹0
रिबेट, धारा 156 (पहले 87A)-₹52,500

कुल टैक्स

₹0

प्रभावी दर: 0.0%

टैक्स बचत के स्मार्ट सुझाव

FY 2026-27 (टैक्स ईयर 2026-27) के लिए आपके आंकड़ों से निकाले गए।

  • नई व्यवस्था में हर साल ₹1,17,000 कम टैक्स

    यानी पुरानी व्यवस्था के मुकाबले हर महीने ₹9,750 ज़्यादा हाथ में (₹0 बनाम ₹1,17,000 टैक्स)।

  • NPS से ₹10,400 बचेंगे, पर सिर्फ़ पुरानी व्यवस्था में

    धारा 124 (पहले 80CCD(1B)) के तहत ₹50,000 निवेश करने पर पुरानी व्यवस्था का टैक्स ₹1,06,600 रह जाता है, फिर भी नई व्यवस्था (₹0) सस्ती है, और उसमें यह कटौती नहीं मिलती।

  • बराबरी के लिए पुरानी व्यवस्था में ₹5,00,000 और कटौतियां चाहिए

    आपकी अतिरिक्त धारा 123 (पहले 80C), धारा 126 (पहले 80D), NPS, HRA या होम लोन कटौतियां इससे ज़्यादा हों, तभी पुरानी व्यवस्था फ़ायदेमंद है।

  • एम्प्लॉयर NPS (धारा 124 (पहले 80CCD(2))) के बारे में पूछें

    एम्प्लॉयर का NPS योगदान बेसिक सैलरी के 14% तक नई व्यवस्था में भी कटौती योग्य है, और इसे आपके CTC के अंदर ही रीस्ट्रक्चर किया जा सकता है।

वेतनभोगी लोगों के लिए अनुमान, सिर्फ़ ऊपर दर्ज कटौतियों के आधार पर। यह निवेश सलाह नहीं है।

नई व्यवस्था: आपकी आय कहां जाती है

सालाना ग्रॉस आय, कम टैक्स वाली व्यवस्था में।

100.0%टैक्स के बाद आय
  • कुल₹12,00,000
ब्योरापुरानी व्यवस्थानई व्यवस्था
टैक्सेबल आय (सालाना)₹10,00,000₹11,25,000
टैक्स (सालाना)₹1,17,000₹0
टैक्स (मासिक)₹9,750₹0
टैक्स के बाद आय (सालाना)₹10,83,000₹12,00,000
टैक्स के बाद आय (मासिक)₹90,250₹1,00,000

नई और पुरानी टैक्स व्यवस्था: ज़रूरी बातें

1 अप्रैल 2026 से नया इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 लागू है, इसलिए FY 2026-27 को “टैक्स ईयर 2026-27” भी कहते हैं। टैक्स स्लैब नहीं बदले, सिर्फ़ धाराओं के नंबर बदले हैं: नई व्यवस्था अब धारा 202 (पहले 115BAC) में है और रिबेट धारा 156 (पहले 87A) में।

नई व्यवस्था डिफ़ॉल्ट है। इसमें ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है और ₹12 लाख तक की टैक्सेबल आय पर धारा 156 का रिबेट पूरा टैक्स हटा देता है, यानी ₹12.75 लाख तक की सैलरी पर कोई टैक्स नहीं। ₹12 लाख से थोड़ा ऊपर मार्जिनल रिलीफ मिलता है: टैक्स उतना ही लगता है जितनी आय ₹12 लाख से ज़्यादा है।

पुरानी व्यवस्था में दरें ज़्यादा हैं, लेकिन कटौतियां मिलती हैं: धारा 123 (पहले 80C) में ₹1.5 लाख तक, धारा 126 (पहले 80D) में हेल्थ इंश्योरेंस, HRA छूट, धारा 22 (पहले 24(b)) में होम लोन ब्याज ₹2 लाख तक और धारा 124 (पहले 80CCD(1B)) में NPS के ₹50,000 अतिरिक्त। यह तभी फ़ायदेमंद है जब आपकी कुल कटौतियां काफ़ी बड़ी हों।

हर महीने हाथ में कितना आएगा, यह CTC से इन-हैंड सैलरी कैलकुलेटर में देखें, और किराए की छूट के लिए HRA छूट कैलकुलेटर।

सवाल-जवाब

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

₹12 लाख सैलरी पर नई व्यवस्था में कितना टैक्स लगेगा?

शून्य। ₹75,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद टैक्सेबल आय ₹11,25,000 रहती है। इस पर ₹52,500 का स्लैब टैक्स बनता है, जिसे धारा 156 (पहले 87A) का रिबेट पूरा हटा देता है।

पुरानी या नई, कौन सी टैक्स व्यवस्था बेहतर है?

ज़्यादातर नौकरीपेशा लोगों के लिए नई व्यवस्था सस्ती पड़ती है। जैसे ₹15 लाख सैलरी पर नई व्यवस्था में ₹97,500 टैक्स लगता है, जबकि पुरानी में ₹1.5 लाख की 80C कटौती के साथ ₹2,10,600। पुरानी व्यवस्था बराबरी पर तब आती है जब स्टैंडर्ड डिडक्शन के अलावा कुल कटौतियां लगभग ₹5,43,800 हों।

नए इनकम-टैक्स एक्ट 2025 में 80C और 87A का क्या हुआ?

दोनों जारी हैं, सिर्फ़ नंबर बदले हैं: 80C अब धारा 123 है (सीमा ₹1.5 लाख) और 87A अब धारा 156 है। FY 2025-26 का रिटर्न पुराने एक्ट के नंबरों से ही भरा जाएगा।

क्या नई व्यवस्था में कोई कटौती मिलती है?

हां, ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन और एम्प्लॉयर का NPS योगदान (बेसिक के 14% तक, धारा 124)। 80C, 80D, HRA और होम लोन ब्याज जैसी कटौतियां नई व्यवस्था में नहीं मिलतीं।

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